देवरों के साथ सोती हैं पत्नियाँ इस गाँव में, पांव तले से ज़मीन खिसक जाएगी वजह जानकर…!

Kupratha

विवाह सामाजिक दृष्टि से

बहुत ही पवित्र बंधन माना जाता है और सामाजिक दृष्टि से क्या यह विवाह का पवित्र बंधन सात जन्मों का होता है. जो के आसमानों पर जोड़ियां बनती हैं इस रिश्ते की अपनी ही एक मर्यादा होती है. लेकिन अब एक मामला सामने आया है जिसे जानने के और सुनने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे. तो हम आपसे चर्चा करते हैं विवाहित जीवन को रस्मो के नाम पर दूसरा ही रूप दे दिया गया है.

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आपको बता दें

कि जहां आज हम 21वीं सदी के इस दौर मे आज के समय में महिला व पुरूष दोनो में कोई भेद भाव नही किया जा रहा है. महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबर का महत्व दिया जाता है.लेकिन आज भी इस संसार मे ऐसी कुछ जगहे है. जहां महिलाओं के साथ जानवरो से भी ज़्यादा बुरा बर्ताव होता है.

आपको बतादे यहां सिर्फ जमीन का बंटवारा होने से बचाने के लिए एक भाई शादी नहीं करके अपने ही भाभी से जबरदस्‍ती शा‍रीरिक संबंध बनाता है.सिर्फ दो गज ज़मीन की रक्षा के लिए एक आदमी को अपनी बीवी अपने भाईयों के साथ बांटनी पडती है. यहाँ की सभी औरतों को अपने परिवार वालों की मर्जी से ही अपने सभी देवरों के साथ जबरन शारीरक संबंध बनाने पड़ते हैं.

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हमारे देश में महिलाओं को लेकर कई कानून पारित किए गए हैं लेकिन यहां इस अजीब व्यवहार जो महिलाओं के साथ देखने को मिला है उसे देखने के बाद नहीं लगता कि यहां के लोग किसी भी भारतीय कानून को मानते हैं और पूरी बेबाकी से इस कानूनों का उल्लंघन भी करते हैं. खबरो के अनुसार इस बुरी प्रथा के पीछे दो प्रमुख कारण माने जाते है.

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एक तो ये कि महिला और पुरूष के बीच में बढ़ रहा लिंगानुपात और दूसरा ये कि लोगों के पास पैसों और जमीन की कमी.ये कहानी राजस्थान अलवर के इस मनखेरा गांव की है.जहां ऐसी कुरीति को सभी निभाते चले आ रही है.लेकिन कोई भी इस बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता और महिलओं को भी हक़ नहीं है कि वे इस मुद्दे पर खुलकर विरोध कर सकें.

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आपकी जानकारी के लिये

बता दे कि इस गांव मे अगर कोई महिला भूल से भी गैर मर्द के साथ संबंध बनाने से इंकार कर देती है तो उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है. सरकार द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला कि कम जमीन होने के कारण यहां के अधिकतर पुरुष अविवाहित है. वर्ष 2013 की बात करें तो यहां हर परिवार एक पुरुष कुंवारा पाया गया था.आपको बतादे इस गांव में हर परिवार का मूल स्रोत खेती ही है.

इसलिए अपनी जायदाद के बंटवारे को बचाने के लिए यहां परिवार मे एक ही महिला के साथ ये बेतुकी प्रथा के चलते सम्बन्ध बनाया जाता है. हम इतना ही कहसकते है इस संसार मे 21वी साड़ी मे हमारे समाज मे इतना बदलाव आने के बाद भी आज भी लोगो मे ऐसी कुरुतिया सुनने को मिलती है.

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